श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.84.3 
श्रूयते हि पुरावृत्तं वासवे सुमहात्मनि।
ब्रह्महत्यावृत: शक्रो हयमेधेन पावित:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महात्मा इन्द्र के विषय में प्राचीन कथा है कि जब इन्द्र पर ब्रह्महत्या का दोष लगा था, तब अश्वमेध यज्ञ करने के बाद ही उनकी शुद्धि हुई थी॥3॥
 
It is an ancient tale about Mahatma Indra that when Indra was accused of the murder of a brahmin, he was purified only after performing the Ashwamedha Yagna.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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