श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.84.16 
स त्वं प्रसादं लोकानां कुरुष्व सुसमाहित:।
त्वत्कृतेन हि सर्वं स्यात् प्रशान्तमरुजं जगत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
"अतः आप ध्यान दीजिए और समस्त लोकों पर अपनी कृपा बरसाइए। आपकी सुरक्षा से ही समस्त जगत् शांत और स्वस्थ हो सकता है॥16॥
 
"Therefore, please pay attention and shower your blessings on all the worlds. Only by your protection can the whole world be peaceful and healthy.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd