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श्लोक 7.84.10  |
स निक्षिप्य सुतं ज्येष्ठं पौरेषु मधुरेश्वरम्।
तप उग्रं समातिष्ठत् तापयन् सर्वदेवता:॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘उसने अपने ज्येष्ठ पुत्र मधुरेश्वर को राजा बनाकर नगरवासियों को सौंप दिया और स्वयं सब देवताओं को कष्ट पहुँचाते हुए घोर तपस्या करने लगा॥10॥ |
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| ‘He made his eldest son Madhureshwar the king and handed him over to the people of the city and started performing severe penance, tormenting all the gods.॥ 10॥ |
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