श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.84.1 
तथोक्तवति रामे तु भरते च महात्मनि।
लक्ष्मणोऽथ शुभं वाक्यमुवाच रघुनन्दनम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्री राम और महात्मा भरत के बीच हुए इस वार्तालाप पर लक्ष्मण ने रघुकुलनन्दन श्री राम से यह शुभ बात कही-॥1॥
 
On this conversation between Shri Ram and Mahatma Bharat, Lakshmana said this auspicious thing to Raghukulnandan Shri Ram -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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