vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 84: लक्ष्मण का अश्वमेध यज्ञ का प्रस्ताव करते हुए इन्द्र और वृत्रासुर की कथा सुनाना, वृत्रासुर की तपस्या और इन्द्र का भगवान् विष्णु से उसके वध के लिये अनुरोध
»
श्लोक 1
श्लोक
7.84.1
तथोक्तवति रामे तु भरते च महात्मनि।
लक्ष्मणोऽथ शुभं वाक्यमुवाच रघुनन्दनम्॥ १॥
अनुवाद
श्री राम और महात्मा भरत के बीच हुए इस वार्तालाप पर लक्ष्मण ने रघुकुलनन्दन श्री राम से यह शुभ बात कही-॥1॥
On this conversation between Shri Ram and Mahatma Bharat, Lakshmana said this auspicious thing to Raghukulnandan Shri Ram -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×