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श्लोक 7.84.1  |
तथोक्तवति रामे तु भरते च महात्मनि।
लक्ष्मणोऽथ शुभं वाक्यमुवाच रघुनन्दनम्॥ १॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम और महात्मा भरत के बीच हुए इस वार्तालाप पर लक्ष्मण ने रघुकुलनन्दन श्री राम से यह शुभ बात कही-॥1॥ |
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| On this conversation between Shri Ram and Mahatma Bharat, Lakshmana said this auspicious thing to Raghukulnandan Shri Ram -॥ 1॥ |
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