श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 82: श्रीराम का अगस्त्य-आश्रम से अयोध्यापुरी को लौटना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.82.8 
तथा वदति काकुत्स्थे वाक्यमद्भुतदर्शनम्।
उवाच परमप्रीतो धर्मनेत्रस्तपोधन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
धर्मचक्षु तपोधन अगस्त्यजी श्री रामचन्द्रजी के ऐसे अद्भुत वचन कहने पर बहुत प्रसन्न हुए और उनसे बोले- 8॥
 
Dharmachakshu Tapodhan Agastyaji was very pleased with Shri Ramchandraji speaking such wonderful words and said to him - 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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