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ramayan 7.82.12: 'रघुश्रेष्ठ! हे यशस्वी! आप समस्त देहधारियों को पवित्र करते हैं। रघुनन्दन! जो लोग पृथ्वी पर आपकी कथा कहते हैं, वे सिद्धि प्राप्त करते हैं।॥12॥   |   ramayan सर्ग 7.82: श्रीराम का अगस्त्य-आश्रम से अयोध्यापुरी को लौटना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 82: श्रीराम का अगस्त्य-आश्रम से अयोध्यापुरी को लौटना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.82.12 
ईदृशस्त्वं रघुश्रेष्ठ पावन: सर्वदेहिनाम्।
भुवि त्वां कथयन्तो हि सिद्धिमेष्यन्ति राघव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'रघुश्रेष्ठ! हे यशस्वी! आप समस्त देहधारियों को पवित्र करते हैं। रघुनन्दन! जो लोग पृथ्वी पर आपकी कथा कहते हैं, वे सिद्धि प्राप्त करते हैं।॥12॥
 
‘Raghushreshtha! Such a glorious one, you purify all embodied beings. Raghunandan! Those who narrate your stories on earth, achieve success.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)