श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 82: श्रीराम का अगस्त्य-आश्रम से अयोध्यापुरी को लौटना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.82.10 
मुहूर्तमपि राम त्वां येऽनुपश्यन्ति केचन।
पाविता: स्वर्गभूताश्च पूज्यास्ते त्रिदिवेश्वरै:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
श्री राम! जो कोई क्षण भर के लिए भी आपका दर्शन कर लेता है, वह पवित्र, स्वर्ग के योग्य और देवताओं के लिए भी पूजनीय हो जाता है॥ 10॥
 
Shri Ram! Whoever gets to see you even for a moment becomes pure, worthy of heaven and worshipable even for the gods.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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