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श्लोक 7.81.22  |
स तैर्ब्राह्मणमभ्यस्तं सहितैर्ब्रह्मवित्तमै:।
रविरस्तंगतो राम गच्छोदकमुपस्पृश॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम! वहाँ एकत्रित हुए सूर्यदेव उन ब्रह्मज्ञानियों द्वारा कहे गए ब्रह्ममंत्रों को सुनकर और उसी प्रकार पूजित होकर पश्चिम दिशा में चले गए। अब आप भी जाकर कुल्ला करें और स्नान आदि करें॥ 22॥ |
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| Shri Ram! The Sun gathered there, after listening to the Brahman mantras recited by those great knowers of Brahman and being worshipped in the same manner, went to the west. Now you too should go and rinse your mouth and take a bath etc.॥ 22॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे एकाशीतितम: सर्ग: ॥ ८ १॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें इक्यासीवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ८ १॥ |
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