श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 81: शुक्र के शाप से सपरिवार राजा दण्ड और उनके राज्य का नाश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.81.20 
तपस्विन: स्थिता ह्यत्र जनस्थानमतोऽभवत्।
एतत् ते सर्वमाख्यातं यन्मां पृच्छसि राघव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस स्थान पर तपस्वी आकर बस गए थे, इसलिए इसका नाम जनस्थान पड़ा। रघुनन्दन! आपने मुझसे जो कुछ पूछा था, वह सब मैंने आपको बता दिया।
 
Ascetics came and settled in this place; hence its name became Janasthan. Raghunandan! I told you all that you had asked me about.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd