श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 81: शुक्र के शाप से सपरिवार राजा दण्ड और उनके राज्य का नाश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.81.16 
श्रुत्वा नियोगं ब्रह्मर्षे: सारजा भार्गवी तदा।
तथेति पितरं प्राह भार्गवं भृशदु:खिता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षिक का यह आदेश सुनकर भृगु कन्या आर्ज्या अत्यन्त दुःखी होकर भी अपने पिता भार्गव से बोली - 'बहुत अच्छा ।'॥16॥
 
On hearing this order of Brahmarshika, the Bhrigu daughter Aarja, despite being very sad, said to her father Bhargava - 'Very good.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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