श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 81: शुक्र के शाप से सपरिवार राजा दण्ड और उनके राज्य का नाश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.81.12 
श्रुत्वा तूशनसो वाक्यं सोऽऽश्रमावसथो जन:।
निष्क्रान्तो विषयात् तस्मात् स्थानं चक्रेऽथ बाह्यत:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य के ये वचन सुनकर आश्रम के निवासी उस राज्य को छोड़कर सीमा के बाहर रहने लगे॥12॥
 
After listening to these words of Shukracharya, the residents of the ashram left that kingdom and started living outside the border.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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