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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 80: राजा दण्डका भार्गव-कन्या के साथ बलात्कार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.80.9 
मा मां स्पृश बलाद् राजन् कन्या पितृवशा ह्यहम्।
गुरु: पिता मे राजेन्द्र त्वं च शिष्यो महात्मन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
"हे राजन! मुझे बलपूर्वक स्पर्श न करें। मैं अपने पिता के अधीन एक कुंवारी कन्या हूँ। राजेन्द्र! मेरे पिता आपके गुरु हैं और आप उस महात्मा के शिष्य हैं।"
 
"O King! Do not touch me forcefully. I am a virgin daughter under the control of my father. Rajendra! My father is your Guru and you are the disciple of that great soul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)