Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.80.15: "आपको प्राप्त करके यदि मैं मारा भी जाऊँ या मुझे अत्यन्त दुःख भोगना पड़े, तो भी मुझे कोई चिन्ता नहीं है। हे कायर! मैं आपका भक्त हूँ। मुझ अत्यन्त दुःखी भक्त को आप स्वीकार करें।"॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.80: राजा दण्डका भार्गव-कन्या के साथ बलात्कार   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 80: राजा दण्डका भार्गव-कन्या के साथ बलात्कार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.80.15 
त्वां प्राप्य तु वधो वापि पापं वापि सुदारुणम्।
भक्तं भजस्व मां भीरु भजमानं सुविह्वलम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
"आपको प्राप्त करके यदि मैं मारा भी जाऊँ या मुझे अत्यन्त दुःख भोगना पड़े, तो भी मुझे कोई चिन्ता नहीं है। हे कायर! मैं आपका भक्त हूँ। मुझ अत्यन्त दुःखी भक्त को आप स्वीकार करें।"॥15॥
 
"After attaining you, even if I am killed or I have to go through extreme pain, I am not worried. O coward! I am your devotee. Please accept me, your devotee, who is extremely distressed."॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)