श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.8.5 
युद्धश्रद्धाथवा तेऽस्ति शङ्खचक्रगदाधर।
अहं स्थितोऽस्मि पश्यामि बलं दर्शय यत् तव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे शंख, चक्र और गदा धारण करने वाले देव! यदि तुम्हारे हृदय में युद्ध करने का साहस है, तो मैं तुम्हारे पास खड़ा हूँ। मैं देखूँ कि तुममें कितना बल है। मुझे अपना पराक्रम दिखाओ।॥5॥
 
O deity holding conch, discus and mace! If you have the courage to fight in your heart, then I am standing by. Let me see how much strength you have. Show me your prowess.'॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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