श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.8.4 
पराङ्मुखवधं पापं य: करोति सुरेश्वर।
स हन्ता न गत: स्वर्गं लभते पुण्यकर्मणाम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे देवराज! जो मनुष्य युद्ध से विमुख सैनिकों का वध करने का पाप करता है, वह इस शरीर को त्यागकर परलोक में जाने पर पुण्यात्मा पुरुषों को प्राप्त होने वाले स्वर्ग को प्राप्त नहीं करता॥4॥
 
O Lord of the gods! One who commits the sin of killing soldiers who are reluctant to fight, after giving up this body and going to the next world, does not attain the heaven which is attained by the virtuous men. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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