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ramayan 7.8.3: नारायणदेव! ऐसा प्रतीत होता है कि आप प्राचीन क्षत्रिय धर्म को बिल्कुल नहीं जानते, इसीलिए आप हम राक्षसों को युद्ध से विमुख और भयभीत होकर भागते हुए साधारण मनुष्यों के समान मार रहे हैं॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.8.3 
नारायण न जानीषे क्षात्रधर्मं पुरातनम्।
अयुद्धमनसो भीतानस्मान् हंसि यथेतर:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
नारायणदेव! ऐसा प्रतीत होता है कि आप प्राचीन क्षत्रिय धर्म को बिल्कुल नहीं जानते, इसीलिए आप हम राक्षसों को युद्ध से विमुख और भयभीत होकर भागते हुए साधारण मनुष्यों के समान मार रहे हैं॥3॥
 
Narayandev! It seems that you do not know the ancient Kshatriya Dharma at all, that is why you are killing us, the demons, just like ordinary people whose mind has turned away from war and who are running away in fear.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)