श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.8.29 
चिरात् सुमाली व्यचरद् रसातलं
स राक्षसो विष्णुभयार्दितस्तदा।
पुत्रैश्च पौत्रैश्च समन्वितो बली
ततस्तु लङ्कामवसद् धनेश्वर:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु के भय से पीड़ित होकर दैत्य सुमाली अपने पुत्रों और पौत्रों के साथ रसातल में बहुत समय तक भटकता रहा। इसी बीच धन के अधिपति कुबेर ने लंका को अपना निवास स्थान बना लिया। 29॥
 
Suffering from the fear of Lord Vishnu, the demon Sumali wandered in the abyss with his sons and grandsons for a long time. In the meantime, Kubera, the ruler of wealth, made Lanka his residence. 29॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डेऽष्टम: सर्ग: ॥ ८ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें आठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ८ ॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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