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श्लोक 7.8.28  |
एषा मया तव नराधिप राक्षसाना-
मुत्पत्तिरद्य कथिता सकला यथावत्।
भूयो निबोध रघुसत्तम रावणस्य
जन्मप्रभावमतुलं ससुतस्य सर्वम्॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार मैंने राक्षसों की उत्पत्ति का सम्पूर्ण वृत्तांत विस्तारपूर्वक आपसे कह सुनाया। हे रघुवंश के शिरोमणि! अब रावण और उसके पुत्रों के जन्म तथा उनके अद्वितीय प्रभाव का सम्पूर्ण वर्णन सुनिए॥ 28॥ |
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| O lord of men! Thus I have narrated to you the entire episode of the origin of the demons in detail. O head of the Raghuvansha! Now listen to the entire description of the birth and unique influence of Ravana and his sons.॥ 28॥ |
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