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ramayan 7.8.2: क्रोध से उसके नेत्र लाल हो रहे थे और मुकुट काँप रहा था। उस रात्रिचर जीव ने भगवान पद्मनाभ से ऐसा कहा -॥2॥   |   ramayan सर्ग 7.8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.8.2 
संरक्तनयन: क्रोधाच्चलन्मौलिर्निशाचर:।
पद्मनाभमिदं प्राह वचनं पुरुषोत्तमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
क्रोध से उसके नेत्र लाल हो रहे थे और मुकुट काँप रहा था। उस रात्रिचर जीव ने भगवान पद्मनाभ से ऐसा कहा -॥2॥
 
His eyes were turning red with anger and his crown was shaking. That night-time creature said this to the Supreme Personality of Godhead Padmanabha -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)