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ramayan 7.8.16: इसी प्रकार उस युद्धप्रिय राक्षस ने भगवान विष्णु को अपने मुक्के से मारा और एक धनुष की दूरी तक पीछे हट गया॥16॥   |   ramayan सर्ग 7.8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.8.16 
तथैव रणरक्तस्तु मुष्टिना वासवानुजम्।
ताडयित्वा धनुर्मात्रमपक्रान्तो निशाचर:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार उस युद्धप्रिय राक्षस ने भगवान विष्णु को अपने मुक्के से मारा और एक धनुष की दूरी तक पीछे हट गया॥16॥
 
Similarly, that war-loving demon struck Lord Viṣṇu with his punch and retreated one bow's length.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)