Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.8.15: तत्पश्चात् उसने काले लोहे का बना हुआ तथा बहुत से काँटों से जड़ा हुआ एक भाला हाथ में लेकर प्रभु की छाती पर गहरा प्रहार किया ॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.8.15 
तत: कालायसं शूलं कण्टकैर्बहुभिश्चितम्।
प्रगृह्याभ्यहनद् देवं स्तनयोरन्तरे दृढम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उसने काले लोहे का बना हुआ तथा बहुत से काँटों से जड़ा हुआ एक भाला हाथ में लेकर प्रभु की छाती पर गहरा प्रहार किया ॥15॥
 
Thereafter, taking in his hand a spear made of black iron and studded with numerous thorns, he struck the Lord deeply on his chest. ॥15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)