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श्लोक  7.8.14 
तया भिन्नतनुत्राण: प्राविशद् विपुलं तम:।
माल्यवान् पुनराश्वस्तस्तस्थौ गिरिरिवाचल:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इससे माल्यवान का कवच कट गया और वह गहरी बेहोशी में गिर पड़ा; लेकिन थोड़ी देर बाद माल्यवान अपने धैर्य को पुनः प्राप्त कर पर्वत के समान स्थिर खड़ा हो गया।
 
This cut off Malyavan's armour and he fell into a deep unconsciousness; but after a little while Malyavan regained his composure and stood as steady as a mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)