श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.8.13 
सा तस्योरसि विस्तीर्णे हारभारावभासिते।
आपतद् राक्षसेन्द्रस्य गिरिकूट इवाशनि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह शक्ति दैत्यराज के विशाल वक्षस्थल पर गिरी, जो मालाओं के समूह से चमक रहा था, मानो किसी पर्वत शिखर पर वज्र गिरा हो ॥13॥
 
That Shakti fell on the huge chest of the King of Demons, which was shining with a cluster of garlands, as if a thunderbolt had struck a mountain peak. ॥13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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