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श्लोक 7.8.12  |
स्कन्दोत्सृष्टेव सा शक्तिर्गोविन्दकरनि:सृता।
कांक्षन्ती राक्षसं प्रायान्महोल्केवाञ्जनाचलम्॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| स्कन्द द्वारा छोड़ी हुई शक्ति के समान, गोविन्द के हाथ से छूटी हुई वह शक्ति उस राक्षस पर ऐसे गिरी, मानो कोई विशाल उल्कापिंड अंजना गिरि पर गिर रहा हो ॥12॥ |
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| Like the Shakti released by Skanda, that Shakti released from Govind's hand aimed at the demon, as if a huge meteorite were falling on Anjana Giri. ॥12॥ |
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