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ramayan 7.8.11: भगवान विष्णु ने, जो बलवान कार्तिकेय को प्रिय थे अथवा जो बलवान स्कन्द को प्रिय थे, वही शक्ति अपनी छाती से खींचकर माल्यवान को दे दी॥11॥   |   ramayan सर्ग 7.8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 8: माल्यवान् का युद्ध और पराजय तथा सुमाली आदि सब राक्षसों का रसातल में प्रवेश  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.8.11 
ततस्तामेव चोत्कृष्य शक्तिं शक्तिधरप्रिय:।
माल्यवन्तं समुद्दिश्य चिक्षेपाम्बुरुहेक्षण:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु ने, जो बलवान कार्तिकेय को प्रिय थे अथवा जो बलवान स्कन्द को प्रिय थे, वही शक्ति अपनी छाती से खींचकर माल्यवान को दे दी॥11॥
 
Lord Vishnu, who was dear to the powerful Kartikeya or who was the beloved of the powerful Skanda, pulled the same power from his chest and gave it to Malyavan. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)