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ramayan 7.78.6: हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले ब्रह्मर्षे! इस प्रकार मैंने प्रजा की रक्षा करते हुए तथा धर्मपूर्वक राज्य करते हुए एक हजार वर्ष व्यतीत किये॥6॥   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.78.6 
एवं वर्षसहस्राणि समतीतानि सुव्रत।
राज्यं कारयतो ब्रह्मन् प्रजा धर्मेण रक्षत:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे उत्तम व्रत का पालन करने वाले ब्रह्मर्षे! इस प्रकार मैंने प्रजा की रक्षा करते हुए तथा धर्मपूर्वक राज्य करते हुए एक हजार वर्ष व्यतीत किये॥6॥
 
‘Brahmarshe who observes the best fast! In this way, I spent a thousand years protecting the people and ruling the kingdom religiously. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)