श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.78.4 
तस्य पुत्रद्वयं ब्रह्मन् द्वाभ्यां स्त्रीभ्यामजायत।
अहं श्वेत इति ख्यातो यवीयान् सुरथोऽभवत्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण! उनकी दो पत्नियाँ थीं जिनसे उन्हें दो पुत्र हुए। मैं उनमें सबसे बड़ा था। मैं श्वेतक नाम से प्रसिद्ध हुआ और मेरे छोटे भाई का नाम सुरथ था।
 
Brahman! He had two wives from whom he got two sons. I was the eldest among them. I became famous by the name of Shwetaka and my younger brother's name was Suratha.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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