श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.78.28 
प्रणष्टे तु शरीरेऽसौ राजर्षि: परया मुदा।
तृप्त: प्रमुदितो राजा जगाम त्रिदिवं सुखम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस शरीर के लुप्त हो जाने पर राजमुनि श्वेत आनंद से संतुष्ट हो सुखपूर्वक ब्रह्मा के सुखमय लोक को चले गए ॥28॥
 
After that body disappeared, the king sage became satisfied with white bliss and happily went to the happy world of Brahma. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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