श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.78.27 
मया प्रतिगृहीते तु तस्मिन्नाभरणे शुभे।
मानुष: पूर्वको देहो राजर्षेर्विननाश ह॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उस शुभ आभूषण का दान स्वीकार करते ही राजा श्वेत का पूर्व शरीर दृष्टि से ओझल हो गया ॥27॥
 
As soon as I accepted the gift of that auspicious ornament, the previous body of King Sweta vanished from sight. ॥27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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