श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.78.26 
तस्याहं स्वर्गिणो वाक्यं श्रुत्वा दु:खसमन्वितम्।
तारणायोपजग्राह तदाभरणमुत्तमम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग के राजा श्वेत के दुःख भरे वचन सुनकर मैंने उन्हें बचाने के लिए वह उत्तम आभूषण धारण किया।
 
Having heard the sorrowful words of the heavenly King Sweta, I took that excellent ornament to save him. 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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