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श्लोक 7.78.25  |
सर्वान् कामान् प्रयच्छामि भोगांश्च मुनिपुङ्गव।
तारणे भगवन् मह्यं प्रसादं कर्तुमर्हसि॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| हे मुनि! इस आभूषण से मैं सम्पूर्ण कामनाओं (इच्छित वस्तुओं) और सुखों का दान कर रहा हूँ। हे प्रभु! मेरी मुक्ति के लिए कृपा कीजिए।॥25॥ |
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| ‘O great sage! With this ornament I am giving away all the desires (desired things) and pleasures as well. O Lord! Please bless me for my salvation.'॥ 25॥ |
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