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श्लोक 7.78.23  |
इदमाभरणं सौम्य तारणार्थं द्विजोत्तम।
प्रतिगृह्णीष्व भद्रं ते प्रसादं कर्तुमर्हसि॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| सौम्य! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! आपका कल्याण हो। कृपया मेरे इस आभूषण को स्वीकार करके मेरा उद्धार करें और मुझे आपका आशीर्वाद प्राप्त हो।॥23॥ |
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| ‘Soumya! O great Brahmin! May you be blessed. Please accept this ornament of mine as a gift to redeem me and may I receive your blessings.॥ 23॥ |
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