श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.78.23 
इदमाभरणं सौम्य तारणार्थं द्विजोत्तम।
प्रतिगृह्णीष्व भद्रं ते प्रसादं कर्तुमर्हसि॥ २३॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! आपका कल्याण हो। कृपया मेरे इस आभूषण को स्वीकार करके मेरा उद्धार करें और मुझे आपका आशीर्वाद प्राप्त हो।॥23॥
 
‘Soumya! O great Brahmin! May you be blessed. Please accept this ornament of mine as a gift to redeem me and may I receive your blessings.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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