श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.78.22 
तस्य मे कृच्छ्रभूतस्य कृच्छ्रादस्माद् विमोक्षय।
अन्येषां न गतिर्ह्यत्र कुम्भयोनिमृते द्विजम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'मुनि! मैं इस संकट में पड़ा हूँ। आप मेरे दर्शन में आये हैं, अतः कृपा करके मुझे इस संकट से बचाइए। ब्रह्मर्षि कुम्भज, आपके अतिरिक्त इस निर्जन वन में कोई और नहीं पहुँच सकता (अतः आप कुम्भयोनि अगस्त्य ही होंगे)॥ 22॥
 
‘Muni! I am in this trouble. You have come in my sight, so please save me from this trouble. Apart from you Brahmarshi Kumbhaj, no one else can reach this deserted forest (so you must be Kumbhayoni Agastya).॥ 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd