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श्लोक 7.78.20  |
सोऽहं भगवत: श्रुत्वा देवदेवस्य निश्चयम्।
आहारं गर्हितं कुर्मि स्वशरीरं द्विजोत्तम॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘द्विजश्रेष्ठ! देवाधिदेव भगवान ब्रह्मा का यह निश्चय सुनकर मैं अपने ही शरीर का घृणित अन्न खाने लगा॥20॥ |
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| ‘Dwijashrestha! Hearing this determination of Devadhidev Lord Brahma, I started eating the disgusting food of my own body. 20॥ |
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