श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.78.20 
सोऽहं भगवत: श्रुत्वा देवदेवस्य निश्चयम्।
आहारं गर्हितं कुर्मि स्वशरीरं द्विजोत्तम॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘द्विजश्रेष्ठ! देवाधिदेव भगवान ब्रह्मा का यह निश्चय सुनकर मैं अपने ही शरीर का घृणित अन्न खाने लगा॥20॥
 
‘Dwijashrestha! Hearing this determination of Devadhidev Lord Brahma, I started eating the disgusting food of my own body. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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