श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.78.19 
स हि तारयितुं सौम्य शक्त: सुरगणानपि।
किं पुनस्त्वां महाबाहो क्षुत्पिपासावशं गतम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! महाबाहु! वे देवताओं को भी बचाने में समर्थ हैं, फिर भूख-प्यास से ग्रस्त आप जैसे पुरुष को संकट से छुड़ाना उनके लिए कौन-सी बड़ी बात है?॥19॥
 
Soumya! Mighty-armed! He is capable of saving even the gods, then what is a big deal for him to free a person like you who is under the grip of hunger and thirst from trouble?'॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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