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ramayan 7.78.18: श्वेता! जब उस वन में भयंकर अगस्त्य मुनि पधारेंगे, तब तुम्हें इस संकट से मुक्ति मिलेगी॥18॥   |   ramayan सर्ग 7.78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.78.18 
यदा तु तद्वनं श्वेत अगस्त्य: स महानृषि:।
आगमिष्यति दुर्धर्षस्तदा कृच्छ्राद् विमोक्ष्यसे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
श्वेता! जब उस वन में भयंकर अगस्त्य मुनि पधारेंगे, तब तुम्हें इस संकट से मुक्ति मिलेगी॥18॥
 
Shweta! When the fierce sage Agastya arrives in that forest, then you will be relieved of this trouble. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)