श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 78: राजा श्वेत का अगस्त्यजी को अपने लिये घृणित आहार की प्राप्ति का कारण बताते हुए ब्रह्माजी के साथ हुए अपनी वार्ता को उपस्थित करना और उन्हें दिव्य आभूषण का दान दे भूख-प्यास के कष्ट से मुक्त होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.78.1 
श्रुत्वा तु भाषितं वाक्यं मम राम शुभाक्षरम्।
प्राञ्जलि: प्रत्युवाचेदं स स्वर्गी रघुनन्दन॥ १॥
 
 
अनुवाद
(अगस्त्यजी कहते हैं:) हे रघुकुलपुत्र राम! मेरे शुभ वचन सुनकर उस देवपुरुष ने हाथ जोड़कर इस प्रकार कहा:॥1॥
 
(Agastya says:) O son of Raghukul, Rama! On hearing my words spoken in auspicious words, that heavenly being, with folded hands replied in this manner:॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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