श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.76.8 
गृहाण च वरं सौम्य यं त्वमिच्छस्यरिंदम।
स्वर्गभाङ् नहि शूद्रोऽयं त्वत्कृते रघुनन्दन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे रघुकुलपुत्र और शत्रुओं का नाश करने वाले श्री राम! आपके पुण्य कर्मों के कारण ही यह शूद्र सशरीर स्वर्ग नहीं जा सका है। अतः आप जो चाहें वर माँग लें।॥8॥
 
O gentle Shri Ram, son of the Raghukul and the destroyer of enemies! It is because of your good deeds that this Shudra has not been able to go to heaven in his physical body. Therefore, you may ask for any boon you wish.'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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