vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान
»
श्लोक 6
श्लोक
7.76.6
पुष्पवृष्टिर्महत्यासीद् दिव्यानां सुसुगन्धिनाम्।
पुष्पाणां वायुमुक्तानां सर्वत: प्रपपात ह॥ ६॥
अनुवाद
उस समय वायुदेव द्वारा बिखेरे गए दिव्य एवं अत्यंत सुगन्धित पुष्पों की भारी वर्षा सब ओर से उन पर होने लगी ॥6॥
At that time a heavy shower of divine and extremely fragrant flowers, scattered by the god of wind, began falling upon them from all sides. ॥ 6॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd