श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.76.6 
पुष्पवृष्टिर्महत्यासीद् दिव्यानां सुसुगन्धिनाम्।
पुष्पाणां वायुमुक्तानां सर्वत: प्रपपात ह॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस समय वायुदेव द्वारा बिखेरे गए दिव्य एवं अत्यंत सुगन्धित पुष्पों की भारी वर्षा सब ओर से उन पर होने लगी ॥6॥
 
At that time a heavy shower of divine and extremely fragrant flowers, scattered by the god of wind, began falling upon them from all sides. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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