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श्लोक 7.76.50-51  |
एवं ब्रुवति काकुत्स्थे मुनिर्वाक्यमथाब्रवीत्॥ ५०॥
शृणु राम यथावृत्तं पुरा त्रेतायुगे युगे॥ ५१॥ |
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| अनुवाद |
| ककुत्स्थकुलभूषण श्री राम के ऐसा पूछने पर अगस्त्य ऋषि बोले - 'श्रीराम! सुनिए, मैं आपको पूर्व चतुर्युगी के त्रेतायुग में घटित हुई घटना सुनाता हूँ।' |
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| On being asked this by Kakutsthakulbhushan Shri Ram, sage Agastya said - 'Shri Ram! Listen, I will tell you the incident which had happened in the Treta Yuga of the previous Chatur Yugi.' |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे षट्सप्ततितम: सर्ग: ॥ ७ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें छिहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ७ ६॥ |
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