श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.76.42 
अक्षुपच्च ततो ब्रह्मा यतो जात: क्षुपो नृप:।
तं ब्रह्मा लोकपालानां समांशै: समयोजयत्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उसी समय ब्रह्माजी को छींक आई, जिससे क्षुप नामक राजा उत्पन्न हुआ। ब्रह्माजी ने उस राजा को लोकपालों द्वारा प्रदत्त तेज के समस्त भाग प्रदान किए। 42।
 
‘At that very moment Brahma sneezed, from which a king named Kshupa was born. Brahma bestowed that king with all the parts of the brilliance given by the Lokpalas. 42.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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