श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  7.76.38-39 
ता: प्रजा देवदेवेशं राजार्थं समुपाद्रवन्।
सुराणां स्थापितो राजा त्वया देव शतक्रतु:॥ ३८॥
प्रयच्छास्मासु लोकेश पार्थिवं नरपुङ्गवम्।
यस्मै पूजां प्रयुञ्जाना धूतपापाश्चरेमहि॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तब सारी प्रजा राजा की माँग करते हुए ब्रह्माजी के पास गई और बोली - 'हे प्रभु! आपने इंद्र को देवताओं का राजा बनाया है। उसी प्रकार हमारे लिए भी किसी महापुरुष को राजा बनाइए, जिनकी पूजा करके हम इस पृथ्वी पर पाप रहित होकर विचरण कर सकें।'
 
‘Then all the subjects went to Lord Brahma for a king and said – ‘O Lord! You have established Indra as the king of the gods. Similarly, make some great man as the king for us also, by worshipping whom we can roam on this earth without any sins.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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