श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  7.76.36-37 
एवमुक्तस्तु रामेण प्रत्युवाच महानृषि:॥ ३६॥
आसन् कृतयुगे राम ब्रह्मभूते पुरायुगे।
अपार्थिवा: प्रजा: सर्वा: सुराणां तु शतक्रतु:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
श्री राम के यह प्रश्न पूछने पर महर्षि अगस्त्य ने उत्तर दिया - 'रघुनन्दन! प्रथम ब्रह्मस्वरूप सत्ययुग में समस्त प्रजा राजाविहीन थी, बाद में इन्द्र को देवताओं का राजा बनाया गया।' 36-37.
 
When Shri Ram asked this question, Maharishi Agastya replied - 'Raghunandan! In the first Brahmaswarupa Satyayug, all the people were without a king, later on Indra was made the king of the gods. 36-37.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd