vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान
»
श्लोक 30
श्लोक
7.76.30
इदं चाभरणं सौम्य निर्मितं विश्वकर्मणा।
दिव्यं दिव्येन वपुषा दीप्यमानं स्वतेजसा॥ ३०॥
अनुवाद
सौम्य! यह विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य आभूषण है, जो अपने दिव्य रूप और तेज से चमक रहा है॥30॥
Soumya! This is a divine ornament made by Vishwakarma, which is shining with its divine form and brilliance.॥ 30॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd