श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.76.27 
सुरा हि कथयन्ति त्वामागतं शूद्रघातिनम्।
ब्राह्मणस्य तु धर्मेण त्वया जीवापित: सुत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
देवता कहते थे कि तुम अधर्मी शूद्र का वध करके आये हो और धर्म के बल से तुमने मृत ब्राह्मणपुत्र को जीवित कर दिया है।॥27॥
 
‘The gods used to say, “You are coming after killing the unrighteous Shudra and by the power of Dharma you have brought back to life the dead son of a Brahmin.”॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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