श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.76.25 
तमुवाच महातेजा: कुम्भयोनिर्महातपा:।
स्वागतं ते नरश्रेष्ठ दिष्टॺा प्राप्तोऽसि राघव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
उस समय महाबली महातपस्वी कुम्भज मुनि बोले, 'पुरुषश्रेष्ठ रघुनन्दन! आपका हार्दिक स्वागत है। आप यहाँ पधारे हैं, यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है॥ 25॥
 
At that time the great ascetic Kumbhaj Muni, who was very powerful, said, 'Raghunandan, the best of men! You are most welcome. It is a matter of great fortune for me that you have come here.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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