श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.76.21 
दृष्ट्वा तु देवान् सम्प्राप्तानगस्त्यस्तपसां निधि:।
अर्चयामास धर्मात्मा सर्वांस्तानविशेषत:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को आते देख तपस्वी पुण्यात्मा अगस्त्य ने उन सबकी समान रूप से पूजा की ॥21॥
 
Seeing the gods coming, Agastya, the virtuous soul of penance, worshiped them all equally. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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