श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.76.15 
यस्मिन् मुहूर्ते काकुत्स्थ शूद्रोऽयं विनिपातित:।
तस्मिन् मुहूर्ते बालोऽसौ जीवेन समयुज्यत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
काकुत्स्थ! जिस क्षण आपने इस शूद्र को मारा था, उसी क्षण यह बालक पुनः जीवित हो गया॥15॥
 
Kaakutstha! In the same moment in which you killed this Shudra, the boy came back to life.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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