श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.76.13 
राघवस्य तु तद् वाक्यं श्रुत्वा विबुधसत्तमा:।
प्रत्यूचू राघवं प्रीता देवा: प्रीतिसमन्वितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर परमज्ञानी भगवान प्रसन्नतापूर्वक उनसे बोले-॥13॥
 
On hearing these words from Sri Raghunathji, the most enlightened god spoke to him happily -॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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