श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 76: श्रीराम के द्वारा शम्बूक का वध, देवताओं द्वारा उनकी प्रशंसा, अगस्त्याश्रम पर महर्षि अगस्त्य के द्वारा उनका सत्कार और उनके लिये आभूषण-दान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.76.12 
तं जीवयत भद्रं वो नानृतं कर्तुमर्हथ।
द्विजस्य संश्रुतोऽर्थो मे जीवयिष्यामि ते सुतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैंने ब्राह्मण को वचन दिया है कि मैं तुम्हारे पुत्र को जीवित कर दूँगा। अतः तुम सबका कल्याण हो। कृपया उस ब्राह्मण बालक को जीवित कर दो। मेरे वचनों को झूठा मत सिद्ध करो।॥12॥
 
‘I have made a promise to the Brahmin that I will bring your son back to life. So may you all be blessed. Please bring that Brahmin boy back to life. Do not prove my words to be false.’॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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